गणपत सिवरू देवी शारदा मां,
लुल लुल लागु थारे पाय,
आई माताजी रा गुण गावसु मां,
सुनजो थे ध्यान लगाय,
नगर बिलाड़ा मैया आविया,
मां घर आया हाम्बडो रे द्वार,
पत्थर री डांग बेटा होवसी,
थारे दियो जगदम्बा वटे श्राप।।
हाम्बडो री पोल सु देवी हालीया मां,
आया आया राठौडो रे द्वार,
आयेने जगदम्बा हेलो मारीयो मां,
बारे आवो माधु री आ मां,
हेलो सुनता ही बारे आविया जाणोजी,
लिया माताजी ने बंधाय,
नीम रे पेड रे बांधीयो पोठीयो मां,
आप पधारीया आंगन माय।।
संवत् 1521 मायने मां,
भादवा री बीज शनिवार,
आया बिलाड़ा नगरी मायने मां,
पाव धर्यो राठौडो रे द्वार,
नगर बिलाड़ा में जीजी बाई सु मां,
आई माता ए केवाय,
अखंड ज्योत मां जगावीया आईजी,
जाणोजी रे घर रे ओ माय।।
निर्धन कहीजे सीरवी जाणोजी ए,
नगर बिलाड़ा रे माय,
घणा रे भाव सु करी सेवना माताजी री,
राजी हुआ आई मात,
एक अरज म्हारी साम्भलो आईजी,
जाणोजी केवे मन री बात,
म्हारो माधु तो म्हारे लाडलो मां,
देवो म्हारे बेटा सु मिलाय।।
केवे आईजी वचन साम्भलो जाणोजी,
माधु आसी उगतडे प्रभात,
काचा सूत रो डोरो देवीयो मां,
नियम बतावे आई मात,
ग्यारह गांठ थेतो बांधजो जी,
ग्यारह दिन करजो पूजा पाठ,
ग्यारहवें दिवस माधु आवियो मां,
करीया आईजी ने प्रणाम।।
हाम्बड़ नगाजी चरने आविया मां,
बोल्यो माता करदो म्हाने माफ़,
घणी रे दयालु आई मावडी मां,
हाम्बडो ने कोटवाल बनाय,
अखंड ज्योत री करी थापना मां,
संवत् 1525 माय,
घणा हर्षावे भगत सीरवी मां,
नगर बिलाड़ा रे माय।।
नगर बिलाड़ा रे मायेने राजा,
भारमल जी करता राज,
राजाजी गया तीर्थ मायने जी,
कोनी आया बिलाड़ा रे माय,
केवे जाणोजी विनती साम्भलो आईजी,
लावो भारमल जी ने मैया आप,
एक परचो माजी देवीयो आईजी,
भारमल जी चरना शिश निवाय।।
नगर बिलाड़ा में बैठा आईजी मां,
सारे मां भगतो रा सगला काज,
राणा रायमलजी ने परचो देवीयो मां,
मिलीयो मेवाड़ रो राज,
बड़ा अरट में परचा आपरा मां,
निवन करे नर नार,
राजा प्रजा निवन करे आयने मां,
सीरवी निमे बारम्बार,
*मनीष सीरवी* चरना आपरी मां,
महिमा दीनी मां बनाय,
*किशोर पालीवाल* गावे भाव सु मां,
जुग जुग चरना रे माय,
आई माताजी रा गुण गावसु मां,
सुणजो थे ध्यान लगाय।।
गायक – किशोर जी पालीवाल सुमेरपुर।
लेखक – मनीष सीरवी (रायपुर जिला ब्यावर राजस्थान)
9640557818








