कुलदेवी हो के मेरी,
क्यूँ सुणती ना अरदास मेरी,
बनभौरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
तर्ज – जा रे हंसा।
के मैं तेरा बेटा कोन्या,
क्यूँ मन्ने तू बिसरा री सै,
सारी दुनिया मौज उड़ावे,
मन्ने क्यूँ तरसा री सै,
तेरी सेवा ही मेरा सच्चा धन सै,
तू हे पूँजी ख़ास मेरी,
बनभोरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
जग के ताने सुण-सुण कै माँ,
भीतर तक मैं टूट गया,
मतलबी दुनिया के चक्कर में,
अपणा हाथ भी छूट गया,
तेरी शरण में आण पडया सूँ,
रखले मैया लाज़ मेरी,
बनभोरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
लोग कहै सै तेरी चौखट पै,
जो आवै वो तर जा सै,
सच्चे दिल तै जो भी ध्यावै,
झोली उसकी भर जा सै,
प्रिंस शुभम नै सारी जिंदगी,
मैया जी तेरे नाम करी,
बनभोरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
कुलदेवी हो के मेरी,
क्यूँ सुणती ना अरदास मेरी,
बनभौरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
गायक / लेखक – प्रिंस जैन / शुभम रिठालिया।
7840820050








