अरे सिमरु देवी शारदा,
धरूँ गजानंद रो ध्यान जी,
महिमा गाऊँ राणा प्रताप री,
सुनजो,
महिमा गाऊँ राणा प्रताप री,
अरे चित्तोड रि बायण माँ सिमरु,
एकलिंग रो नाथ जी,
निवण करूँ मेवाड़ी भोम ने,
जग में,
निवण करूं मेवाड़ी भोम ने।।
तर्ज – गाज्यो गाज्यो जेठ आषाढ़।
अरे मुग़लों री सेना भारी,
मेवाड़ भोम चढ़ आइ जी,
खबरया लागी राणा प्रताप ने,
पल में,
खबरया लागी राणा प्रताप ने,
अरे हाथी घोड़ा लश्कर ले,
अकबर की सेना आइ जी,
अरे आय ने रुकगी मोलेला गाँव में,
या तो,
आय ने रुकगी मोलेला गाँव में।।
अरे शीश कटे पण झुके नही,
मैं रजपूतन को जायों हूँ,
सिंह ज्यूँ करी राणे ललकार जी,
ज़ोर सु,
सिंह ज्यूँ करी राणे ललकार जी,
अरे कमर कटारों हाथ में भालों,
दूजे हाथ तलवार जी,
रण में चाल्या राणा प्रताप जी,
रिस कर,
रण में चाल्या राणा प्रताप जी।।
अरे गूंजी गूंजी चेतक री,
टापा ईण हल्दीघाटी में,
अरे उन चेतक पर बेठया,
राणा प्रताप जी,
अरे चाली चाली राणा री,
तलवार हल्दीघाटी में,
घोड़े संग कटग्या बेरी पल मायने,
रण में,
घोड़े संग कटग्या बेरी पल मायने।।
अरे हल्दीघाटी री माटी खून ज्यूँ,
लालम लाल होगी जी,
पल में भर ग्यो एक रक्त,
तलाव जी,
खून सु,
पल में भर ग्यो एक रक्त,
तलाव जी,
अरे मुग़लों री सेना पाछि,
मेवाड़ छोड़कर भागी जी,
जयकारा लाग्या राणा प्रताप रा,
ज़ोर सु,
जयकारा लाग्या एकलिंग रे नाथ रा।।
अरे अमर वेग्यो इतिहासा में,
नाम हल्दीघाटी रो,
अमर वेग्या राणा प्रताप जी,
जग में,
अमर वेग्या राणा प्रताप जी,
अरे धन धन हे मेवाड़ धरा,
धन धन राणा प्रताप ने,
धन धन हे म्हारा राजस्थान ने,
जग में,
धन धन हे म्हारा राजस्थान ने।।
अरे सिमरु देवी शारदा,
धरूँ गजानंद रो ध्यान जी,
महिमा गाऊँ राणा प्रताप री,
सुनजो,
महिमा गाऊँ राणा प्रताप री,
अरे चित्तोड रि बायण माँ सिमरु,
एकलिंग रो नाथ जी,
निवण करूँ मेवाड़ी भोम ने,
जग में,
निवण करूं मेवाड़ी भोम ने।।
🎤 गायक / Singer – ईश्वर सिंह परमार।
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