हे मनवा मोन मारू,
तल भर नहीं है तारू,
फसे केम करे मारू मारू रे,
भजलो ने हरी हा हा।।
जनमेयो थू जाये मरी,
वात वीरा मोन खरी,
फसे कदी सुगरत करी रे,
सिमरू ने हरी हा हा।।
संपथी ने सुंदर नारी,
हती वीरा लागे प्यारी,
पण आखीर थारी ने,
सिमरू ने हरी हा हा।।
बाला पण अजोण मे खोयु,
जवोनी मे ऊसु जोयो,
पगथा पण मे दुःख ना रोहियो रे,
सिमरू ने हरी हा हा।।
हे रतना नंद नी हासी वोणी,
बजावेने करे होनी,
सिमरे जयोरी दही ऊजोणी रे,
सिमरू ने हरी हा हा।।
हे मनवा मोन मारू,
तल भर नहीं है तारू,
फसे केम करे मारू मारू रे,
भजलो ने हरी हा हा।।
गायक – विंजू परमार।
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