हो जवानी रो हो अभिमानी रो,
बंदा मत कर जोर,
जवानी रो।।
दौड़ दौड़ धन गणो ही कमायो रे,
पुन नहीं करियो एक ओनी रो,
जिवडा मत कर जोर,
जवानी रो।।
खा ले रे पीले बन्दा और ख़र्च ले रे,
अरे आगे घर नहीं थारे नानी रो,
जिवडा मत कर जोर,
जवानी रो।।
मरता ने देख जीवडा तू ही मरजासी रे,
हे ढिगलो हो जासी एक भोनी रो,
जिवडा मत कर जोर,
जवानी रो।।
कहत कबीर सुणो भाई साधो रे,
अरे शरणो ले लो नी गुरु ज्ञानी रो,
जिवडा मत कर जोर,
जवानी रो।।
हो जवानी रो हो अभिमानी रो,
बंदा मत कर जोर,
जवानी रो।।
गायक – लक्ष्मण दास वैष्णव कड़वड़।
प्रेषक – कुलदीप सिंह ओसियां।
9468586253








