मंगल भवन अमंगल हारी चौपाई लिरिक्स
मंगल भवन अमंगल हारी, द्रबहुसु दसरथ अजर बिहारी। राम सियाराम सियाराम, जय जय राम।। होइ है वही जो राम रच...
Read moreDetailsमंगल भवन अमंगल हारी, द्रबहुसु दसरथ अजर बिहारी। राम सियाराम सियाराम, जय जय राम।। होइ है वही जो राम रच...
Read moreDetailsरंगों की बहार आई लखदातार, बैठे सूरत बना के क्यों भोली, निकलो मंदिर से, खेलांगा श्याम होली, निकलो मंदिर से,...
Read moreDetailsसात सुरों की देवी सरस्वती, दे ऐसा वरदान, मधुर स्वरों में करता रहूं मैं, मधुर स्वरों में करता रहूं मैं,...
Read moreDetailsहे महारानी जग कल्याणी, वाहन तेरा विशाल है, शेर की सवारी माँ, तुम्हारी बेमिसाल है।bd। जब जब भीड़ पड़ी भक्तों...
Read moreDetailsमाँ कभी तो दरश दिखाएगी, माफ़ कर देगी माँ गुनाह मेरे, अपनी गोदी में माँ सुलाएगी, माँ कभी तो दरस...
Read moreDetailsअरी मैया कन्हैया की, शरारत क्या कहूँ नटखट की, गगरिया फोड़ दी मेरी, गगरिया फोड दी मेरी, की आकर पाछे...
Read moreDetailsकन्हैया धरती पे आया, चौपाई - जब जब होई धरम के हानी, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी। तब तब प्रभु धरि...
Read moreDetailsमेरे ह्रदय बसे श्री राम, बोले बीच सभा हनुमान, की सीना चीर दिखाए, वो सीना चीर दिखाए, मत लेना इम्तेहान, ना...
Read moreDetailsजब भी सावन रुत आए, दोहा - जब जब सावन की रुत आए. भक्तों का दिल ललचाए, के कावर उठा...
Read moreDetailsप्रेम भक्ति से मिलकर पुकारो, भोले बाबा हमारे मिलेंगे, तन में भस्मी भभुति रमाए, नाग गर्दन में धारे मिलेंगे, भोले...
Read moreDetails© 2016-2026 Bhajan Diary