मेरा घुंघरू बोले हरे हरे,
गोविन्द हरे गोपाल हरे,
जय जय प्रभु दीनदयाल हरे,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
एह घुँघरू मैनुं सतगुरु दित्ते,
एह घुँघरू मैनुं सतगुरु दित्ते,
मैं तरले कीते बड़े-बड़े,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
मैं नच्चा मेरा गिरिधर नच्चे,
मैं नच्चा मेरा गिरिधर नच्चे,
मैनूं होर वी मस्ती चढ़े चढ़े,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
सुन घुँघरू मेरा देवर लड़दा,
सुन घुँघरू मेरा देवर लड़दा,
मेरी सास रैहंदी मैथों परे परे,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
उल्टा-पुल्टा कई कुछ कैंहदे,
उल्टा-पुल्टा कई कुछ कैंहदे,
मैनु बोल सुनावन सढ़े-सढ़े,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
छुट जाने इह महल चोबारे,
छुट जाने इह महल चोबारे,
रह जाने सुख धरे-धरे,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
गा लै गीत ‘मधुप’ गिरिधर दे,
गा लै गीत ‘मधुप’ गिरिधर दे,
हरि सिमरन विच सुख बड़े-बड़े,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
मेरा घुंघरू बोले हरे हरे,
गोविन्द हरे गोपाल हरे,
जय जय प्रभु दीनदयाल हरे,
मेरा घुँघरू बोले हरे हरे।।
🎤 गायक / Singer – श्री चित्र विचित्र जी महाराज।
✍️ लेखक / Lyrics – श्री मधुप हरि जी महाराज।
📜 प्रेषक / Upload By – ललिता जी।








