चलो नाकोड़ा जी दरबार चले,
संग लेके सारा परिवार,
चले चलो नाकोड़ा जी दरबार चले,
सँग लेके सारा परिवार चले,
छोड़कर सारा कारोबार चले,
सँग लेके सारा परिवार चले।।
तर्ज – तूफानों ने घेरा फिर भी।
मेवा नगर का सुन्दर नजारा,
पहाड़ियों मे मंदिर है प्यारा,
पारस प्रभु के सँग विराजे,
भक्तो ये भैरव देव हमारा,
इनकी कृपा से हर संकट टले,
सँग लेके सारा परिवार चले,
छोड़कर सारा कारोबार चले,
सँग लेके सारा परिवार चले।।
पारस प्रभु माँ वामा के प्यारे,
भैरव देव है अम्बा के दुलारे,
सच्चे मन से जो आये है द्वारे,
पल मे हो जाये है वारे न्यारे,
मिट जाये गम जहाँ खुशियाँ मिले,
सँग लेके सारा परिवार चले,
छोड़कर सारा कारोबार चले,
सँग लेके सारा परिवार चले।।
दरबार है ये सबसे निराला,
दर पे जो आये वो किस्मत वाला,
ऋषभ कहे मेरे पार्श्व भैरव का,
भक्तो इस जग मे है बोल बाला,
दिलबर हमको रहना इनकी छाँव तले,
सँग लेके सारा परिवार चले,
छोड़कर सारा कारोबार चले,
सँग लेके सारा परिवार चले।।
चलो नाकोड़ा जी दरबार चले,
संग लेके सारा परिवार,
चले चलो नाकोड़ा जी दरबार चले,
सँग लेके सारा परिवार चले,
छोड़कर सारा कारोबार चले,
सँग लेके सारा परिवार चले।।
गायक – ऋषभ सेठिया अहमदाबाद।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








