सोलह दिन तर्पण करो,
श्रद्धा सुमन से श्राद्ध करो।।
ना जाने किस रुप में वो,
श्राद्ध ग्रहण कर जाएंगे,
सोचते हम रह जाएंगे,
वो छाया रुप में आएंगे,
पितरों की मुक्ति के लिए,
छोटा सा सत्कर्म करो,
सोलह दिन तर्पण करों,
श्रद्धा सुमन से श्राद्ध करो।।
नरसी के पितरों का तर्पण,
माधव आकर खुद करें,
हम भी मंगल श्राद्ध करें,
भगवन ऐसी कृपा करें,
सब कुछ दे सकते है वो,
विनती सब मिलकर करो,
सोलह दिन तर्पण करों,
श्रद्धा सुमन से श्राद्ध करो।।
गया श्राद्ध तर्पण करने से,
पितृ बैकुंठ को जाते है,
पितरो की सेवा करने से,
सब ऋण से तर जाते है,
ऐसा नागर जतन करो,
पितरो की जयकार करो,
सोलह दिन तर्पण करों,
श्रद्धा सुमन से श्राद्ध करो।।
सोलह दिन तर्पण करो,
श्रद्धा सुमन से श्राद्ध करो।।
ॐ पित्रेश्वराय विद्महे,
पूर्वजाय धीमहि,
तन्नो पितृ: प्रचोदयात्।
लेखक / गायक – पंडित मनोज नागर।
9893377018








