म्हारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
दोहा – अर्जी ले कर आवियों,
मारा ठाकुर मंडपिया ठेठ,
थारी शरणा मायने,
मारो तन मन धन सब भेट।।
मारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
कर्मा की कारी,
कर्मा की कारी र लगा दे,
कर्मा की कारी।।
थारा दर पे आयो सावरा,
खाली हाथ पसारी,
अखियां में विश्वास ज़रे,
ओर दिल में आस तुम्हारी,
डूबी नैया पार लगा दे,
बन खेवणहारी,
मारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
कर्मा की कारी।।
मारी किस्मत कोरो कागज,
थोड़ी कलम चलाले,
थारी मर्जी बिना सवारियां,
पत्ता भी ना हाले,
किरपा से खिल जावे,
सुखी जीवन की डारी,
मारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
कर्मा की कारी।।
भटक भटक कर हार गयो पर,
कोई हार ना लेवे,
मारा पराया मौसा बोले,
दुनियां ताना देवे,
मर्जी वे ज्यु राख श्याम या,
जिन्दगी अब थारी,
मारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
कर्मा की कारी।।
मारी अर्जी सुनो सावरा,
मतना देर लगाओ,
भूल गयो दुनियां दारी में,
आकर राह बताओ,
थारो हु थारो ही रेसयू,
बात बिगड़ सी थारी,
मारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
कर्मा की कारी।।
कलमकार की कलम चलावे,
सवारियों गिरधारी,
थोड़ी कृपा कर शानू पे,
गणी गणी बलिहारी,
चाकर हूँ मैं करु चाकरी,
थारे चरणा री,
मारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
कर्मा की कारी।।
म्हारी फूटी र किस्मत के लगा दे,
कर्मा की कारी,
कर्मा की कारी र लगा दे,
कर्मा की कारी।।
लेखक एवं गायक – शानू रेगर सांवता।
9610489087








