ईतनो बड़ो म्हारो भाग्य है म्हारा बाबा राजस्थानी भजन

ईतनो बड़ो म्हारो भाग्य है,
म्हारा बाबा,
था सो देव मिल्या म्हान,
राजी राखो जी,
ओ बाबा श्याम जी,
सगला न राजी राखो जी,
ओ बाबा श्याम जी।।



सावरा मोटा धनी और,

जग में थारो नाम है,
बड़ा बड़ा थे कारज सार्य,
छोटो सो म्हारो काम है,
अर्जी कर्णो फर्ज म्हारो,
जोर कुछ चाले नहीं,
थारी मर्जी के बिना,
इक पत्तो भी हाले नहीं,
नित उठ थारो,
ध्यान धरां म्हारा बाबा,
घनी करां मनुहार,
पलक उघाड़ो जी,
ओ बाबा श्याम जी .
सगळा नै राजी राखिजो,
ओ बाबा श्याम जी।।



श्याम म्हारी जिंदगी और,

श्याम ही म्हारा प्राण है,
श्याम ही जद रूठगी तो,
जीने को के काम है,
भूल सारी माफ़ कर द्यो,
चरणां स्यूं लेवो लगाय,
ठोकरां खाई बोहोत,
अब आके सही रस्तो दिखा,
थारे बिना कईयां जीवस्या,
ओ म्हारा बाबा,
थे ही दिन्या बिसराय,
ओल्यू थारी आवे जी,
ओ बाबा श्याम जी .
सगळा नै राजी राखिजो,
ओ बाबा श्याम जी।।



ईतनो बड़ो म्हारो भाग्य है,

म्हारा बाबा,
था सो देव मिल्या म्हान,
राजी राखो जी,
ओ बाबा श्याम जी,
सगला न राजी राखो जी,
ओ बाबा श्याम जी।।

गायक श्री नवरतन जी पारीक।


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