भावो को सुनता है,
कुछ ना कहता है,
सच्चे प्रेमी से ही,
सेवा लेता है,
दिखता नहीं,
पर संग रहता है,
भावों को सुनता है,
कुछ ना कहता है।।
तर्ज – फूलों का तारों का।
दुःख से हारा प्रेमी,
जब हो जाता उदास,
ना जाने क्यों दिल से,
आती है ये आवाज,
इनकी शरण में है,
फिर क्यों डरता है,
सच्चे प्रेमी से ही,
सेवा लेता है,
दिखता नहीं,
पर संग रहता है,
भावों को सुनता है,
कुछ ना कहता है।।
वो नसीबों वाला है,
जिनको श्याम मिला,
वो घर है भाग्यशाली,
जिसे श्याम का ध्यान मिला,
सुख दुःख का पहिया तो,
चलता रहता है,
सच्चे प्रेमी से ही,
सेवा लेता है,
दिखता नहीं,
पर संग रहता है,
भावों को सुनता है,
कुछ ना कहता है।।
हिम्मत बढ़ जाती है,
जब श्याम गाउं मैं,
हर मुश्किल को आसान,
होता पाऊं मैं,
पग पग पर प्रेमी की,
रक्षा करता है,
सच्चे प्रेमी से ही,
सेवा लेता है,
दिखता नहीं,
पर संग रहता है,
भावों को सुनता है,
कुछ ना कहता है।।
सच्चे भाव का भूखा,
इसे भजन सुनाए जा,
ये सारे जग का मालिक,
इसे मीत बनाए जा,
धीमे धीमे से ये,
प्रेम पनपता है,
सच्चे प्रेमी से ही,
सेवा लेता है,
दिखता नहीं,
पर संग रहता है,
भावों को सुनता है,
कुछ ना कहता है।।
भावो को सुनता है,
कुछ ना कहता है,
सच्चे प्रेमी से ही,
सेवा लेता है,
दिखता नहीं,
पर संग रहता है,
भावों को सुनता है,
कुछ ना कहता है।।
गायक – अभिषेक नामा।








