चालो सैया सतगुरु के दरबार,
बाल बाल में मोती पोले,
सजले सोलह सिणगार।।
मान सरोवर दिल विच भारिया,
गल गो मेल उतार,
ज्ञान साबन से कपड़ा धोले,
कचरों परे निवार,
चालों सइयां सतगुरु के दरबार।।
लगनी गो लहंगा पेरो मोरी सजनी,
निज मन नाड़ो सार,
चरणा गी जंफर अंग विच डारो,
बटन जड़ले चार,
चालों सइयां सतगुरु के दरबार।।
चेतन चुनडी चित कर ओढो,
निरगुण सुरमो सार,
ॐ शब्द गी बिंदिया लगाले,
हिय हरिगो हार,
चालों सइयां सतगुरु के दरबार।।
प्रेम पाल पेरा विच पैरो,
जद उठेली झणकार,
सेंट फुवारा नाम गां लगाले,
हो जावेगी महकार,
चालों सइयां सतगुरु के दरबार।।
सत गो थाल जुगत स्यूं झेलो,
जिणमे मोती जवाहर,
पांच पच्चीस मिल सब सखिया,
गाओ मंगलाचार,
चालों सइयां सतगुरु के दरबार।।
चालो सैया सतगुरु के दरबार,
बाल बाल में मोती पोले,
सजले सोलह सिणगार।।
गायक – राजू राजस्थानी।
प्रेषक – लिछीराम प्रजापत।
9982000790








