जावां मैं जावां बलिहार,
सतगुरु किरपा तो।
दोहा – पुण्य किए कुछ पिछले जन्म में,
जो पाया गुरु जी का साथ,
छोड़ गुरु जी के चरणों को,
ना चाहूँ बैकुंठ का वास,
करूँ वंदना इन चरणों की,
ये है हरि के अवतार,
गुरु कृपा से सबको होता,
हरि का साक्षात्कार,
बिगड़ी बात बना ले रे बंदे,
उस गुरु के चरण सिर धार,
सदा बरसती रहे सभी पर,
करुणा की बौछार।
जावां मैं जावां बलिहार,
सतगुरु किरपा तो,
सतगुरु किरपा तो,
सतगुरु किरपा तो,
जावा मैं जावा बलिहार,
सतगुरु किरपा तो।
सतगुरु मेरे दीनदयाल,
सतगुरु मेरे कृपा निधान।।
शीश नवा जदो अरज सुनाई,
शीश नवा जदो अरज सुनाई,
बिनती होई स्वीकार,
सतगुरु किरपा तो,
जावा मैं जावा बलिहार,
सतगुरु किरपा तो।।
ज्ञान दी ऐसी ज्योत जगाई,
ज्ञान दी ऐसी ज्योत जगाई,
मेट्यो मन अंधकार,
सतगुरु किरपा तो,
जावा मैं जावा बलिहार,
सतगुरु किरपा तो।।
कोल बिठा समझाया सतगुरु,
कोल बिठा समझाया सतगुरु,
जीवन है मेला दिन चार,
सतगुरु किरपा तो,
जावा मैं जावा बलिहार,
सतगुरु किरपा तो।।
‘शांत’ कहे थाई मर जावा,
‘शांत’ कहे थाई मर जावा,
भूला जे गुरु उपकार,
सतगुरु किरपा तो,
जावा मैं जावा बलिहार,
सतगुरु किरपा तो।।
जावा मैं जावा बलिहार,
सतगुरु किरपा तो,
सतगुरु किरपा तो,
सतगुरु किरपा तो,
जावा मैं जावा बलिहार,
सतगुरु किरपा तो।
सतगुरु मेरे दीनदयाल,
सतगुरु मेरे कृपा निधान।।
Singer – Shri Chitra Vichitra Bihari Daas Ji Maharaj
Lyrics – Virendra Sant Ji








