जब जब नांव भंवर में डोले,
खुद पतवार चलाता है,
वो रुक ना पाता है,
सांवरिया आता है।।
माँ बाबुल के जैसे मुझ पर,
अपना प्यार लुटाता है,
सच्ची प्रीत निभाने को,
मेरा बाबा दौड़ा आता है,
जब जब नांव भंवर में डोले,
खुद पतवार चलाता है,
वो रुक ना पाता हैं,
सांवरिया आता है।।
जब जब ग्यारस आती है,
मन पंछी बन जाता है,
उड़ कर खाटू आ जाऊं,
चैन नहीं मुझे आता है,
जब जब आने की सोचूं मैं,
घर तक लेने आता है,
वो रुक ना पाता हैं,
सांवरिया आता है।।
मुझको तो विश्वास है,
सांवरिया मेरे साथ है,
आज कन्हैया जो कुछ भी है,
तेरी ही करामात है,
जब जब कोई संकट आता,
मोरछड़ी लहराता है,
वो रुक ना पाता हैं,
सांवरिया आता है।।
जबसे तुझको जाना है,
बस अपना ही माना है,
एक तमन्ना मुरली वाले,
खाटू में बस जाना है,
मेरा खाटू वाला बाबा,
सोये भाग जगाता है,
वो रुक ना पाता हैं,
सांवरिया आता है।।
जब जब नांव भंवर में डोले,
खुद पतवार चलाता है,
वो रुक ना पाता है,
सांवरिया आता है।।
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🎤 गायक / Singer – Kanhaiya Jha
✍️ लेखक / Lyrics – Kanhaiya Jha
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