मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नन्द किशोर दयासागर,
मेरे भार को सिर से उठा लीजै,
हे नंद किशोर दयासागर,
हे नंद किशोर दयासागर,
हे अवध किशोर कृपा सागर,
मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नंद किशोर दयासागर।।
मैं भूल गया तुमको गिरधर,
दुनियाँ के धन्धों में फँसकर,
अपराध को मेरे क्षमा कीजै,
हे नंद किशोर दयासागर,
मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नंद किशोर दयासागर।।
अब विमुख अनेकों जनम गये,
अस्थावर जंगम रूप भये,
यह पुनरावृत्ति मिटा दीजै,
हे नंद किशोर दयासागर,
मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नंद किशोर दयासागर।।
शिशु कर्म कुकर्म है करता ही,
पर पिता उसे है क्षमता ही,
मुझ दीन पर नाथ दया कीजै,
हे नंद किशोर दयासागर,
मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नंद किशोर दयासागर।।
तुम करूणानिधि कहलाते हो,
दुखियों के दुख मिटाते हो,
अब ‘राम’ को भी अपना लीजै,
हे नंद किशोर दयासागर,
मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नंद किशोर दयासागर।।
मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नन्द किशोर दयासागर,
मेरे भार को सिर से उठा लीजै,
हे नंद किशोर दयासागर,
हे नंद किशोर दयासागर,
हे अवध किशोर कृपा सागर,
मेरी नैया को पार लगा दीजे,
हे नंद किशोर दयासागर।।
स्वर – पं. मनीष गौतम शास्त्री।
9981109023








