ऐसो कोई नहीं रे,
ऐसों कोई नही रे,
या हीरा को परखैया राम,
कोई नही रे।।
हीरा की ली पोटली ने,
सतगुरु मांड्यो हाट,
हेला देई देई ग्राहक तेड़े,
हेला देई देई ग्राहक तेड़े,
पर मांडे ना कोई हाथ,
ऐसों कोई नही रे,
ऐसों कोई नही रे,
या हीरा को परखैया राम,
कोई नही रे।।
भोगी आए ढोंगी आए,
जोगी नहीं रे,
योगी आया गांव में तो,
योगी आया गांव में तो,
वहां गई नहीं रे,
ऐसों कोई नही रे,
ऐसों कोई नही रे,
या हीरा को परखैया राम,
कोई नही रे।।
अनमोल रतन का देने वाला,
देता है बिन मोल,
बिच बाजार बिछायत मांडी,
बिच बाजार बिछायत मांडी,
और बजाए ढोल,
ऐसों कोई नही रे,
ऐसों कोई नही रे,
या हीरा को परखैया राम,
कोई नही रे।।
ज्ञान तराजू लेकर बैठ्यो,
दियो भण्डारो खोल,
छांट छांट कर तुम्ही चढ़ालो,
छांट छांट कर तुम्ही चढ़ालो,
वो तोल करे ना मोल,
ऐसों कोई नही रे,
ऐसों कोई नही रे,
या हीरा को परखैया राम,
कोई नही रे।।
राम नाम को हाट लगायो,
घर जाने की बार,
परख परख के पाँव धरो रे,
संभल संभल कर कदम रखो रे,
या यमरापुर की बाट,
ऐसों कोई नही रे,
ऐसों कोई नही रे,
या हीरा को परखैया राम,
कोई नही रे।।
ऐसो कोई नहीं रे,
ऐसों कोई नही रे,
या हीरा को परखैया राम,
कोई नही रे।।
स्वर – सन्त श्री कमल किशोर जी नागर।
प्रेषक – मनीष सोंधिया।
8120861780








