सरयू किनारे देखो,
अवध नगरिया,
राम है पधारे,
सिया लक्ष्मण पधारे,
इस आंगन में आंगन में,
राम सिया जोड़ी देख,
भर आये अखियाँ,
प्रभु घर आये,
संग खुशियाँ लाये,
इस जीवन में जीवन में।।
तर्ज – कौन दिशा में।
बीत गए युग कितने अब तक,
राम सिया से बिछड़न को,
कब से खड़े है इंतजार में,
अपने प्रभु के दर्शन को,
अब नगरी में आई है उजाला(2x),
दीप जले हर द्वार हो,
हर चेहरे पे छाये,
मीठी मुसकनीया,
राम है पधारे,
सिया लक्ष्मण पधारे,
इस आंगन में आंगन में।।
कितना अनोखा बंधन है ये,
राम सिया और लक्ष्मण का,
सबके हृदय में बसते हैरघुवर,
मोती है सबके मन का,
अवधपुरी में अब रंग रलिया(2x),
हर घर में खुशहाल हो,
उनके दरश में ही,
बीते ये उमरिया,
राम है पधारे,
सिया लक्ष्मण पधारे,
इस आंगन में आंगन में।।
सरयू किनारे देखो,
अवध नगरिया,
राम है पधारे,
सिया लक्ष्मण पधारे,
इस आंगन में आंगन में,
राम सिया जोड़ी देख,
भर आये अखियाँ,
प्रभु घर आये,
संग खुशियाँ लाये,
इस जीवन में जीवन में।।
Singer / Lyricist – Ankita Dash








