भवन पे वोहे आवै सै,
जिसने मात बुलावे सै।।
माँ की मेहर बिन,
पत्ता ना हिलता,
फल किस्मत का,
सबनै मिलता,
जिसा करै वैसा ए पावै सै,
जिसने मात बुलावे सै।।
नाम रटैं जो,
सच्चे दिल तै,
दूर रहे वो,
हर मुश्किल तै,
बिगड़े काम बनावै सै,
जिसने मात बुलावे सै।।
दूध निर माँ,
आप छाणती,
सबके मन की,
बात जाणती,
रस्ता सही दिखावै सै,
जिसने मात बुलावे सै।।
रमेश सदा,
विश्वास राखिए,
हर पल माँ तै,
आश राखिए,
फेर तू क्यूं घबरावै सै,
जिसने मात बुलावे सै।।
भवन पे वोहे आवै सै,
जिसने मात बुलावे सै।।
गायक – पंडित रमेश कौशिक बनभौरी धाम।
79000-31433








