कंवर किकरिये रा देव,
मेरे मन भाया,
सब कटग्या कर्म कलेश,
कंवर न ध्यायां,
कंवर किकरियें रा देव,
मेरे मन भाया।।
धरयो धरण अवतार,
बाशक रा जाया,
बाशक रा जाया,
देवो दुखियां रा दुख मेट,
अजब थारी माया,
कंवर किकरियें रा देव,
मेरे मन भाया।।
शीश मुकुट असवार,
घोड़े चढ आया,
घोड़े चढ आया,
जद पड़ी भगतां में भीड़,
थे कष्ट मिटाया,
कंवर किकरियें रा देव,
मेरे मन भाया।।
सांचां ग सिर हाथ,
गले से लगाया,
गले से लगाया,
बाबो रे वे दुष्टां सूं दूर,
ना दर्श दिखाया,
कंवर किकरियें रा देव,
मेरे मन भाया।।
निराकार निर्लेप,
निर्गुण निरमाया,
निर्गुण निरमाया,
पवन कहे बलवन्त,
पार नही पाया,
कंवर किकरियें रा देव,
मेरे मन भाया।।
कंवर किकरिये रा देव,
मेरे मन भाया,
सब कटग्या कर्म कलेश,
कंवर न ध्यायां,
कंवर किकरियें रा देव,
मेरे मन भाया।।
गायक – समुन्द्र चेलासरी।
प्रेषक – मनीष कुमार लौट।
मो. – 8107115329








