शोभा न्यारी जी,
बाग की महिमा न्यारी जी,
सतगुरु भलो लगायो बाग,
बाग की शोभा न्यारी जी।।
ई बाग में दस दरवाजा,
खिड़की न्यारी जी,
सतगुरु खिड़की न्यारी जी,
सौदागर सौदों करे खुली बजारा जी,
सतगुरु भलों लगायों बाग,
बाग की शोभा न्यारी जी।।
अरे ई बाग में दो फल निपजे,
नर और नारी जी,
ओ सतगुरु नर और नारी जी,
सतगुरु भलों लगायों बाग,
बाग की शोभा न्यारी जी।।
ई बाग में तीन दौरा बयएक सारी जी,
वो सतगुरु बयक सारी जी,
हिंगला पिंगला बय सुगलन्हा,
खिलगी क्यारी जी,
सतगुरु भलों लगायों बाग,
बाग की शोभा न्यारी जी।।
शोभा न्यारी जी,
बाग की महिमा न्यारी जी,
सतगुरु भलो लगायो बाग,
बाग की शोभा न्यारी जी।।
गायक – अंकित प्रजापत बारां।
Mob. 8949203651








