प्रभु पारस को दिल में बसाना,
जिनके चरणों में झुकता जमाना,
भक्ति भाव से इनको रिझाना,
जिनके चरणों में झुकता जमाना।।
करुणा सागर है वामा का नंदन,
छोड़ दुनिया को जोड़ इनसे बंधन,
रिस्ता जन्मो जन्म का निभाना,
भक्ति भाव से इनको रिझाना,
प्रभू पारस को दिल मे बसाना,
जिनके चरणों में झुकता जमाना।।
यही पालनहार यही तारणहार,
यही जीवन नैया का है खेवनहार,
कभी भूल से ना इनको भुलाना,
भक्ति भाव से इनको रिझाना,
प्रभू पारस को दिल मे बसाना,
जिनके चरणों में झुकता जमाना।।
मोह माया से मन को हटाले,
प्रभू पारस से प्रीत लगाले,
“दिलबर” करना ना कोई बहाना,
भक्ति भाव से इनको रिझाना,
प्रभू पारस को दिल मे बसाना,
जिनके चरणों में झुकता जमाना।।
प्रभु पारस को दिल में बसाना,
जिनके चरणों में झुकता जमाना,
भक्ति भाव से इनको रिझाना,
जिनके चरणों में झुकता जमाना।।
गायक – भव्य जैन अहमदाबाद।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








