लख चोरासी में घणो दुख पायो नैना जुण धरोसा

लख चोरासी में घणो दुख पायो नैना जुण धरोसा
राजस्थानी भजन

लख चोरासी में घणो दुख पायो,
नैना जुण धरोसा,
अब के आय पडयो गुरू सरणे,
अरे सीर पे हाथ धरो ने गुरा सा,
मापे मेर करो सा,
अरे माप मरे करोसा
भोल्यो जिव भटक मर जावे,
नानो जीव भटक मर जावे,
अरे थोडी थोडी किरपा ने गुरा सा,
मापे मेर करो सा।।



पारस देख लोहार मन हरस्यो,

करे मारो किक भरोसा,
अरे काया मारी करलो सोलमी रे,
काया मारी करलो सोलमी,
अब कंचन हाथ धरो ना गुरा सा,
मापे मेर करो सा।।



गुरू बीन साई करे कुण जीव री,

लाख उपाई करोसा रे,
करोड उपाई करोसा,
नानो जीव ने जतने कर राखो,
भोला जीव ने जतने कर राखो,
अब दोई दोई हाथ धरोना गुरा सा,
मापे मेर करो सा।।



रामा नंदजी लीख रीपोटा,

दुरगा मे पस करोसा,
कव कबीर सुणो भाई सादु,
वणत कबीर सुणो भाई सादु,
मारी दुरमा मे दुर करो ने,
गुरा सा माप मेर करोसा,
मापे मेर करो सा।।



लख चोरासी में घणो दुख पायो,

नैना जुण धरोसा,
अब के आय पडयो गुरू सरणे,
अरे सीर पे हाथ धरो ने गुरा सा,
मापे मेर करो सा,
अरे माप मरे करोसा
भोल्यो जिव भटक मर जावे,
नानो जीव भटक मर जावे,
अरे थोडी थोडी किरपा ने गुरा सा,
मापे मेर करो सा।।

प्रेषक – गायक रूपलाल लोहार
9680208919


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