क्या सोचता है पागल मनवा,
जो बीत गया सो बीत गया,
इस झूठे खेल में मूल्य ही क्या,
कोई हार गया कोई जीत गया,
क्या सोच करें पागल मनवा,
जो बीत गया सो बीत गया।।
हम चाहे वही हो जरुरी नहीं,
आशाएँ कभी हुई पूरी कहीं,
रे सोच तनिक जीवन घट का,
श्वाँसा जल कितना रीत गया,
क्या सोच करें पागल मनवा,
जो बीत गया सो बीत गया।।
प्रभु प्रेम पियूष पिया जिसने,
परहित हित जन्म लिया जिसने,
जीवन है वही जो जन जन के,
मृदु अधरों का बन मीत गया,
क्या सोच करें पागल मनवा,
जो बीत गया सो बीत गया।।
जब सूर्य सा साथी मिलता है,
‘राजेश’ कमल तब खिलता है,
हर साँझ को कहता है पंकज,
हम कैसे मिले मीत गया,
क्या सोच करें पागल मनवा,
जो बीत गया सो बीत गया।।
क्या सोचता है पागल मनवा,
जो बीत गया सो बीत गया,
इस झूठे खेल में मूल्य ही क्या,
कोई हार गया कोई जीत गया,
क्या सोच करें पागल मनवा,
जो बीत गया सो बीत गया।।
Singer – Deepak Upadhyay Ji
7017413208
Writer – Shri Rajeshwaranandji Maharaj








