होया करै ना चिंता में काम रै सब का रुखाला बैठ्या श्याम रै

होया करै ना चिंता में काम रै,
सब का रुखाला,
बैठ्या श्याम रै।।

तर्ज – होया करै सिर नीचा अभिमान का।



यो भी मेरा वो भी मेरा,

समझै सै दिन रात तू,
ना कोई यहां भाई तेरा,
कद समझै या बात तू,
इब तात तू,
कर दब कै आराम रै,
सुबेरे ही चालां खाटू धाम रै,
होया करे ना चिंता में काम रे,
सब का रुखाला,
बैठ्या श्याम रै।।



चिंता मै चिंतन ना होवै,

तन्नै कै बैरा कोनी,
लोग कहवं सै उमर भी प्यारे,
चिंता मै रह ज्या पौनी,
पड़ ज्या खौनी,
पूंजी आज तमाम रै,
डाक्टर कै जाकै लिकडै घाम रै,
होया करे ना चिंता में काम रे,
सब का रुखाला,
बैठ्या श्याम रै।।



नुगरे नर ना हो किस्सै कै,

“गुरु तंवर” कह यार सही,
“जालान” क्यूं ना समझ में आवै,
जीवन का एक सार यही,
तु छोड़ बही,
अब लिख दिल से कलाम रै,
सांवरे का ऊपर,
लिख दे नाम रै,
होया करे ना चिंता में काम रे,
सब का रुखाला,
बैठ्या श्याम रै।।



होया करै ना चिंता में काम रै,

सब का रुखाला,
बैठ्या श्याम रै।।

गायक व भजन लेखक – पवन जालान।
9416059499 भिवानी (हरियाणा)


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