हर हर सुंदर दयाल,
आरती निर्मल करे,
धन हो धन महाराज,
धन की आरती करें,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
महाभारत म,
टीटोरी हर हर करें,
धन हो धन हो महाराज,
गज ना घंटा गिरे,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
लाखा मंदिर माय,
पांडव अरज़ करे,
धन हो धन हो महाराज,
पैय्यरा राह बने,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
भक्त प्रहलाद कारण,
तापा खंब धरे,
धन हो धन हो महाराज,
नरसिंग रूप धरे,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
बाई द्रोपदा कारण,
दुशासन चीर हरे,
धन हो धन हो महाराज,
अम्बर चीर पूरे,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
बाई मीरा कारण,
राणा रोस भरे,
धन हो धन हो महाराज,
विष अमरित करे,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
गुरु म्हारो दासन को दास,
मुख से काहू न भजे,
धन हो जगन्नाथ प्रसाद,
ब्रह्मगीर आरती करें,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
हर हर सुंदर दयाल,
आरती निर्मल करे,
धन हो धन महाराज,
धन की आरती करें,
हर हर सुँदर दयाल,
आरती निर्मल करे।।
प्रेषक – अजय।
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