वाला का ढावा पे थाको,
देवरो वो भैरू,
नीची या मुलक मेवाड़,
खजुरिया ठाकर,
शरणे आया ओ।।
रात अंधारी गेलो चिकणो ओ भैंरू,
दरपु जी वन में एकली ओ भैंरू,
खजुरिया ठाकर,
शरणे आया ओ।।
एक जड़ूलिया रे कारणे वो भैंरू,
सासुजी बोले कड़वा बोल,
खजुरिया ठाकर,
शरणे आया ओ।।
शरणे आया ने सोरा राखजो ओ भैंरू,
राखोनी हिवड़े लगाय,
भैरूजी थांके,
शरणे आया ओ।।
खजुरिया वाला ओ,
भैरू मतवाला ओ,
मैं आयो थांके द्वार,
भैरूजी दर्शन दीज्यो वो।।
दुखिया रा दुखड़ा पल में,
मेट दो वो भैरू,
बाजडली ऊभी थाके द्वार,
भैरूजी वाकी आस पुरावो जी।।
मांगू बा हजुरया सेवा माईने वो भैंरू,
सेवा करे वो दिन रात,
भैरूजी थाके शरणे आया वो।।
वाला का ढावा पे थाको,
देवरो वो भैरू,
नीची या मुलक मेवाड़,
खजुरिया ठाकर,
शरणे आया ओ।।
गायक – गौरव सिंह।
संपर्क – 6367177676








