तू तो सबसे बड़ी है हिंगलाज,
उतारा थारी आरती।।
पाव में पायल सोहनी ए मैया,
थारे बिछिया री रमजोल,
उतारा थारी आरती।।
कमरिया कंदोरो सोहनों ए मैया,
थारे चटको लूमादार,
उतारा थारी आरती।।
नाका में नतड़ी सोहनी है मैया,
थारे गले विच नवसर हार,
उतारा थारी आरती।।
गैर घुमालो मैया गागरो ए,
थारे ओडवा ने दखनी रो चीर,
उतारा थारी आरती।।
नागजी ब्राह्मण बोलिया ए मैया,
थारा भक्ता ने होरा राख,
उतारा थारी आरती।।
तू तो सबसे बड़ी है हिंगलाज,
उतारा थारी आरती।।
गायक – गोरधन गिरी जी महाराज।
प्रेषक – सम्पत पुरी गोस्वामी देवरी मठ।
8000468275








