भई रे छोड्यो पिन्जरीया रो हेत हंसो परखंडा चालीयो लिरिक्स

भई रे छोड्यो पिन्जरीया रो हेत,
हंसो परखंडा चालीयो।

दोहा – हाड़ जले जैसे लकडी जल गई,
केश जले जैसे घासा,
सोने जैसी काया जल गई,
कोई नी आया पासा।



भई रे छोड्यो पिन्जरीया रो हेत,

हंसो परखंडा चालीयो,
भई रे छोड्यो पिंजरीये रो हेत,
हंसो परखंडा चालीयो,
अरे भई रे मुओ घड़ी रो मेहमान,
कडावु बारे काडीयो,
भई रे मुओ घड़ी रो निज मान,
कडावु बारे काडीयो।।



भई रे धोली चादर ली ओडाय,

घेनो ने गाठो ले लियो,
भई रे धोली चादर ली ओडाय,
घेनो ने गाठो ले लियो,
भई आयो ज्यु पाछो ही जाय,
साथ किनो नही चालीयो,
भई रे आयो ज्यु पाछो ही जाय,
साथ किनो नही चालीयो,
भई रे चार जणो रे खांदे चार,
ढेरो मसाना देवीयो,
भई रे चार जणो रे खांदे चार,
ढेरो मसाना देवीयो,
भई रे छोड्यो पिंजरीये रो हेत,
हंसो परखंडा चालीयो,
अरे भई रे मुओ घड़ी रो मेहमान,
कडावु बारे काडीयो।।



भई रे कांटो री झूर बिछाय,

लकडो मे ऊंदो लेटीयो,
भई रे कांटो री झूर बिछाय,
लकडो मे ऊंदो लेटीयो,
भई रे लोपो लगावे बेटा लाय,
दुरा सु हेलो देवीयो,
भई रे लोपो लगावे बेटा लाय,
दुरा सु हेलो देवीयो,
भई रे कितरी लाडकी थारी काया रे,
भस्मी रो ढिगलो वेगीयो,
भई रे कितरी लाडकी थारी काया रे,
भस्मी रो ढिगलो वेगीयो,
भई रे छोड्यो पिंजरीये रो हेत,
हंसो परखंडा चालीयो,
अरे भई रे मुओ घड़ी रो मेहमान,
कडावु बारे काडीयो।।



भई रे दोरा मे दो दिन किनो याद,

बस्ती वाला बिसारीयो,
भई रे दुखड़ा मे दो दिन किनो याद,
बस्ती वाला बिसारीयो,
अरे भोला मुओ कमायो थारो माल,
दुजा ही कोई दाबीयो,
अरे भोला मुओ कमायो थारो माल,
दुजा ही कोई दाबीयो,
भई रे पुण्य पापो री साथे पोट,
खर्चो खावन ने गालीयो,
भई रे पुण्य पापो री साथे पोट,
खर्चो खावन ने गालीयो,
भई रे छोड्यो पिंजरीये रो हेत,
हंसो परखंडा चालीयो,
अरे भई रे मुओ घड़ी रो मेहमान,
कडावु बारे काडीयो।।



रामजी पाछी नर देह किकर पाय,

चौरासी चक्रों चालीयो,
रामजी पाछी नर देह किकर पाय,
चौरासी चक्रों चालीयो,
रामजी झूठी माया रा झूठा जाल,
गला मे फंदो गालीयो,
रामजी झूठी माया रा झूठा जाल,
गला मे फंदो गालीयो,
रामजी दीनो नारायण हाथो दान,
साथे वो थारे हालीयो,
रामजी दीनो नारायण हाथो दान,
साथे वो थारे हालीयो,
भई रे छोड्यो पिंजरीये रो हेत,
हंसो परखंडा चालीयो,
अरे भई रे मुओ घड़ी रो मेहमान,
कडावु बारे काडीयो।।



भई रे छोड्यो पिन्जरीया रो हेत,

हंसो परखंडा चालीयो,
भई रे छोड्यो पिंजरीये रो हेत,
हंसो परखंडा चालीयो,
अरे भई रे मुओ घड़ी रो मेहमान,
कडावु बारे काडीयो,
भई रे मुओ घड़ी रो निज मान,
कडावु बारे काडीयो।।

गायक – कुशल बारठ & प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
9640557818


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