वो दिन दूर नहीं रे मनवा,
वो दिन दूर नही।।
धर्मपुरी में पड़ेगा जाना,
होगा वहां पर तेरा बयाना,
धर्मपुरी में पड़ेगा जाना,
होगा वहां पर तेरा बयाना,
खुलेगी खाता बही रे मनवा,
वो दिन दूर नही।।
सत्संग सेवा सुमिरन कर ले,
पुण्यों से तू झोली भर ले,
सत्संग सेवा सुमिरन करले,
पुण्यों से तू झोली भर ले,
जीवन सार यही रे मनवा,
वो दिन दूर नही।।
वो दिन दूर नहीं रे मनवा,
वो दिन दूर नही।।
स्वर – प्रेम नारायण जी गेहूंखेड़ी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन।
मो. – 9926652202








