मुकुंद घोड़ो सोवणो रे,
दोहा – मुकुंद घोड़ों नवलखो,
ज्यारी मोतिया जड़ी रे लगाम,
रूणजुण बजावे घुघरा,
तो झूम उठे ब्रह्मधाम।
ओ रात उडीकी दिनडो ऊगियो,
खेतेश्वर म्हारा रे,
कठौड़े लगाई ईतरी देर जी,
काई थारो मुकुंद घोड़ो,
थाकियो खेतेश्वर म्हारा रे,
काई थाने भक्ता लिना घेर जी,
अरे मुकुंद घोड़ो,
ओ हो मुकुंद घोड़ो,
मुकुंद घोड़ो मोवणो रे,
खेतेश्वर म्हारा रे,
मनडो मोवे है ब्रह्मधाम रे।।
खाईजो खाईजो नी उड़द मोगरा,
मुकुंद घुडला रे,
पिवजो जमना जी रो ही नीर जी,
अरे मुकुंद घोड़ो,
ओ हो मुकुंद घोड़ो,
मुकुंद घोड़ो मोवणो रे,
खेतेश्वर म्हारा रे,
मनडो मोवे है ब्रह्मधाम रे।।
अरे हिन्डो घलवायदू,
हरिया बाग में खेतेश्वर म्हारा ओ,
झूलण रे मिस थे तो आवजो,
मुखड़ों देखूं मुकुंद रो,
खेतेश्वर म्हारा ओ,
सूरत लागे मन भावनी,
अरे मुकुंद घोड़ो,
ओ हो मुकुंद घोड़ो,
मुकुंद घोड़ो मोवणो रे,
खेतेश्वर म्हारा रे,
मनडो मोवे है ब्रह्मधाम रे।।
थारे पगलिया रा घुंघरू बाजणा रे,
म्हारा मुकुंद घुडला रे,
भगत आवे है जिणपर नाचता,
अरे मुकुंद घोड़ो,
ओ हो मुकुंद घोड़ो,
मुकुंद घोड़ो मोवणो रे,
खेतेश्वर म्हारा रे,
मनडो मोवे है ब्रह्मधाम रे।।
मुलक मुलक में तो गावे है,
कुलदीप महिमा रे,
कुलदीप ओसियां जोड़े है हाथ जी,
ओ रात उडीकी दिनडो,
ऊगियो खेतेश्वर म्हारा ओ,
कठोडे लगाई ईतरी देर जी,
अरे मुकुंद घोड़ो,
ओ हो मुकुंद घोड़ो,
मुकुंद घोड़ो सोवणो रे,
खेतेश्वर म्हारा रे,
मनडो मोवे है ब्रह्मधाम रे।।
गायक – अनिल नागौरी।
प्रेषक – कुलदीप सिंह ओसियां।
9468586253








