बड़ा चतुर है बंसी वाला,
वो तुमको ठग जाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा।।
नंदी को ले साथ में,
भोले पहुंचे वृंदावन,
मुरली वाला कहने लगा,
लेलो जी जो चाहे मन,
जरा सी धरती दो बैलों से,
जरा सी धरती दो बैलों से,
काम मेरा चल जाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा।।
घास फूस डाला बोरे में,
आलू सारे छोड़ दिए,
बीच बजरिया लूट आए,
भाग्य हमारे फोड़ दिए,
एक नंबर का छलिया है,
एक नंबर का छलिया है,
बिन छले नहीं रह पाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा।।
फिर से खेती करने लगे है,
बाजरा बोया भोले ने,
बाजरा दे दिया ठाकुर को और,
घास भर लिया झोले में,
फिर से लूट लिया भोले को,
फिर से लूट लिया भोले को,
सबको पता लग जाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा।।
ऊपर नीचे की फसल,
वो कन्हैया मेरी है,
बीच में मक्का उपजेगी,
वो फसल बस तेरी है,
तीसरी बारी लूट आए तुम,
तीसरी बारी लूट आए तुम,
शोर प्रभु मच जाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा।।
नाम के भोले काम के भोले,
ये इनकी पहचान है,
सबको सबकुछ बांटना,
ये ही इनकी शान है,
‘आशु’ रहना इन चरणों में,
‘खुशबू’ रहना इन चरणों में,
यहीं से तू सब पाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा।।
बड़ा चतुर है बंसी वाला,
वो तुमको ठग जाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा,
रहने दो मेरे भोले जी,
तुमसे ना हो पाएगा।।
स्वर – खुशबु राधा जी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








