पारणा है विजयनगर में,
छाई खुशियाँ है देखो हर घर में,
वर्षीतप की सुन्दर तपस्या,
हो रही गाँव शहर में,
पारणा है विजय नगर में,
छाई खुशियाँ है देखो हर घर में।।
तेरह मास की कठिन तपस्या,
तप ये महान बताया,
प्रथम किया जिसे ऋषभ देव ने,
वर्षीतप ये कहाया,
त्याग तपस्या और संयम से,
सफल हो जीवन पलभर में,
पारणा है विजय नगर में,
छाई खुशियाँ है देखो हर घर में।।
आखा तीज का ये शुभ अवसर,
आया हमारे द्वार,
भव्य तपस्वी का होगा पारणा,
छाया हर्ष अपार,
श्रेयांश कुमार बन पारणा कराओ,
ऋषभ विराजे मन मंदिर में,
पारणा है विजय नगर में,
छाई खुशियाँ है देखो हर घर में।।
सुमनदेवी प्रेमचंद जी है,
ये नहार परिवार,
तपस्वी है वर्षीतप के,
अनुमोदन है बारम्बार,
“दिलबर” नितिन के संग मे गाओ,
ताली बजाकर एक स्वर में,
पारणा है विजय नगर में,
छाई खुशियाँ है देखो हर घर में।।
पारणा है विजयनगर में,
छाई खुशियाँ है देखो हर घर में,
वर्षीतप की सुन्दर तपस्या,
हो रही गाँव शहर में,
पारणा है विजय नगर में,
छाई खुशियाँ है देखो हर घर में।।
गायक – नितिन जैन, चंचल।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








