मनड़े का मोरिया रे,
आजा सोनाणा में चाला।
दोहा – सोनाणा रा भेरूजी री,
आड़ी टेडी छाया,
मांगयो बेटों दे दी बेटी,
वा भेरू री माया।
साकल रा सर्राटा बाजे,
ओर भोपा धूणये शिर,
अरे गाय गाय म्हारा भेरू थारो,
अमर करा संगीत।
कल्लालल ने कालो दीदो,
घरवाली ने गोरों,
अरे पड़ोसन ने छोरी दिनी,
घरवाली ने छोरों।
अरे थानें चुगो चूगाउ हाथा में,
ए थाने भजन सुनाऊ राता में,
दिलडे का मोरिया रे,
मनड़े का मोरिया रे,
दिलडे का मोरिया रे,
आजा सोनाणा में चाला।।
ए मंनडे रा फूल चढ़ावाला,
मैं तो पैदल पैदल आवाला,
दिलडे का मोरिया रे,
मनडे का मोरिया रे,
दिलडे का मोरिया रे,
आजा सोनाणा में चाला।।
ए थे तो घुंघरिया घमकावाला,
ए थारे जसन जोगनिया लावाला,
दिलडे का मोरिया रे,
मनडे का मोरिया रे,
दिलडे का मोरिया रे,
आजा सोनाणा में चाला।।
भाई तरुण वैष्णव गावे जी,
थारे चरणा में शीश नमावे जी,
दिलडे का मोरिया रे,
मनडे का मोरिया रे,
दिलडे का मोरिया रे,
आजा सोनाणा में चाला।।
अरे थानें चुगो चूगाउ हाथा में,
ए थाने भजन सुनाऊ राता में,
दिलडे का मोरिया रे,
मनड़े का मोरिया रे,
दिलडे का मोरिया रे,
आजा सोनाणा में चाला।।
गायिका – दिव्या वैष्णव।
प्रेषक – रोनित वैष्णव बाली।
9030847884








