करमा का कोड़ थने खासी,
जंजाली जीवड़ा,
करमा का कोड थने खासी।।
जैसा बोया बीज खेत में,
वैसा ही फल पासी,
केर खेजड़ा बोया बोलिया,
आम कटा सु खासी,
जंजाली जीवड़ा,
करमा का कोड थने खासी।।
लाग लाग लोगा के छाले,
घणी किदी बदमाशी,
भलो अपनो छावा ने,
दी ओरा के फांसी,
जंजाली जीवड़ा,
करमा का कोड थने खासी।।
केन बड़ा को कदी ना कीदो,
चालियो मन की हासी,
जान बुझ खाडा में पड़गयो,
पड़यो पडयो पछतासी,
जंजाली जीवड़ा,
करमा का कोड थने खासी।।
नया नया फुलड़ा पे,
भैरव का भंवरा लुभासी,
खिलया फूल सभी कमलासी,
बासना रह जासी,
जंजाली जीवड़ा,
करमा का कोड थने खासी।।
करमा का कोड़ थने खासी,
जंजाली जीवड़ा,
करमा का कोड थने खासी।।
स्वर – किशन गाडरी चित्तौड़गढ़।
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