आओ एकन वार माजीसा,
घणी करां मनुहार माजीसा,
भगत जोवे थोरी बाट,
माजीसा आवोनी थे आवोनी।।
अरे मोत्या सु थारे थाल सजायो,
कुंकुम तिलक लगावु जी,
रंग बिरंगा फूलडा मै लायो,
आंगनीयो सजायो जी,
कुंकुम पगले मांड माजीसा,
एकर घरा पधार माजीसा,
भगत जोवे थोरी बाट,
माजीसा आवोनी थे आवोनी।।
लाल कसुमल ओडो चुनड़ी,
गले नवलखो हार मां,
सिर पर थारे रखडी सोवे,
बिंदिया तपे ललाड मां,
भगतो रे आंगन आओ माजीसा,
एकर घरा पधार माजीसा,
भगत जोवे थोरी बाट,
माजीसा आवोनी थे आवोनी।।
तेरस आयी चांदनी मां,
दिवला री ज्योत जगावु मां,
गोरी गाय रो घिरत मंगावु,
दिवला री ज्योत जगावु मां,
मेवा मिठाई चाढु चूरमो,
रुच रुच भोग लगावु मां,
आरती करूं सुबह शाम आपरी,
आओ ढोला रे ढमकार माजीसा,
भगत जोवे थोरी बाट,
माजीसा आवोनी थे आवोनी।।
*दास खेराज* री विनती आ,
*गुड़िया* चरना माई जी,
*स्वरुप* ने मां चरना राखो,
धरजो सिर पर हाथ जी,
*रायपुर सु मनीष सीरवी*,
नित उठ जोडे हाथ जी,
रेखा सुथार गाय सुनावे,
करदो भवसु पार जी,
दीजो दर्शन आय माजीसा,
भगतो री सुनो पुकार माजीसा,
भगत जोवे थोरी बाट,
माजीसा आवोनी थे आवोनी।।
आओ एकन वार माजीसा,
घणी करां मनुहार माजीसा,
भगत जोवे थोरी बाट,
माजीसा आवोनी थे आवोनी।।
गायिका – रेखा जी सुथार।
लेखक – मनीष सीरवी रायपुर।
(जिला ब्यावर राजस्थान)
9640557818








