म्हे तो निकलग्या खाटूधाम से,
पण म्हासूँ ना निकल्यो खाटूधाम,
साँवरिया म्हाने ओठों बुला ल्यो जी,
खाटू का राजा पाछो बुला ल्यो जी।।
हेत लग्यो ऐसो कैसो सांवरिया,
सुपणे में आवे थारी खाटू नगरिया,
थे ही दीखो हो चारों मेर में,
चाहे सुबहे हो चाहे शाम,
बस म्हारो म्हारै मन पे ना चाल्यो जी,
दयालू दाता हेत बढ़ाज्यों जी।।
सुध म्हारी ज्यूँ जाणो बाबा त्यूँ लीज्यो,
मिलके बिछड़नो म्हासूँ ना कीज्यो,
बीज यो बोया थे ही सांवरा,
बीज ने दीज्यो उपजाय,
बागां में फूलड़ा थे ही खिलावो जी,
बागां का माली थे ही कुहावो जी।।
देखे जो ना दिनु थाणे मणड़ो यो तड़पे,
आग कालजड़े में मिलणे की धधके,
भाव का भूखा थे हो सांवरा,
घूम्यो मैं तो सारो संसार,
जो मिल्यो म्हाने यो ही समझायो जी,
हारे को साथी थारो नाम बतायो जी।।
म्हे तो निकलग्या खाटूधाम से,
पण म्हासूँ ना निकल्यो खाटूधाम,
साँवरिया म्हाने ओठों बुला ल्यो जी,
खाटू का राजा पाछो बुला ल्यो जी।।
Singer – Vivek Sharma ‘Jitu’
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