लगा के आस मैं बैठा हूँ,
एक जमाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।।
कभी पत्थर की,
अहिल्या को आप तारे हो,
कभी भिलनी के,
झूठे बेर भी स्वीकारे हो,
मिले हनुमान को तुम,
राम नाम सुनाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।।
कभी तुलसी के आप,
राम जी कहाए हो,
कभी मीरा के लिए,
विष को भी पचाए हो,
मिले रसखान को,
ब्रज धूल तुम लगाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।।
कभी ग्वालों के आप,
सखा जी कहाए हो,
कभी मैया के कभी,
बाबा के मन भाए हो,
मिले ब्रजवासियों को,
गोवर्धन उठाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।।
कभी मैंने सुना,
दुखियों का दुख मिटा के मिले,
कभी तो ये सुना,
रूठों को तुम मना के मिले,
मिलो इस दास को भी,
चरणों में बिठाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।।
लगा के आस मैं बैठा हूँ,
एक जमाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।।
Singer – Prakash Gandhi








