ये जग सुख दुख का एक मेला,
सुख में हैं सब संगी साथी,
दुख में रहत अकेला।।
इस जग में जो दिल को लगावे,
अंत पड़े पछताना,
तुझको भी तो खबर है सब कुछ,
संग न जाए धेला,
ये जग सुख दुख का इक मेला।।
नाम हरि का मन में बसा ले,
नेक कर्म करता चल,
कर्म ही तेरे सन्मुख होंगे,
जब जावन की वेला,
ये जग सुख दुख का इक मेला।।
ये जग सुख दुख का एक मेला,
सुख में हैं सब संगी साथी,
दुख में रहत अकेला।।
गायक – राजकुमार भारद्वाज।
संपर्क – 9034581000








