दीवाने जाग जा रे,
दोहा – सोया सोया क्या करे,
उठ दीवाने जाग,
ये अवसर बीता जा रहा,
तू राम नाम सें लाग।
दीवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया,
ठगों की नगरिया ये है,
चोरो की नगरिया,
दिवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया।।
चेतन होइ रहना रे,
काया मे फेरी देना रे,
सुमरण सुन मे करना रे,
प्याला भर भर पीना रे,
रेल सु थारा दिनड़ा जाए ओ ओ ओ,
बीते उमरिया रे,
दिवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया।।
चेतन हो जा पंछी रे,
काया थारी कांची रे,
माया अजब रचाई रे,
भक्ति राम की साँची रे,
यम के द्वारे जानो पड़ेगो ओ ओ ओ,
आयो नंबरिया रे,
दिवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया।।
संग मे कोई नहीं साथी रे,
काया खुद को मनाती रे,
मन थारो बैंडो हाथी रे,
कोई की माने न बाती रे,
साधु संत थारे हेला पाड़े ओ ओ ओ,
लम्बी डगरिया रे,
दिवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया।।
तन थारो खूब थकेला रे,
काम थारा कय नी आवे रे,
तन थारो ठग ठग खावे रे,
काया बन जल जावे रे,
होइ होशियार तु चेतन रहना ओ ओ ओ,
सुन्य शिखरिया रे,
दिवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया।।
दीवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया,
ठगों की नगरिया ये है,
चोरो की नगरिया,
दिवाने जाग जा रे,
ये है ठगों की नगरिया।।
गायक – भेरूसिंह जी चौहान।
प्रेषक – घनश्याम बागवान।
7879338198








