वर्षीतप की कठिन साधना,
फिर भी यह सुखदाई है,
कर्म निर्जरा को करने की,
मंगल घड़ियां आई है,
मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ें,
मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ें,
यही राह अब तो सुहाई है,
कर्म निर्जरा को करने की,
मंगल घड़ियां आई है।।
तर्ज – चाँद सितारें फूल और।
तेरह महीने तेरह दिन की,
जप-तप की ये कमाई है,
आदिनाथ की दिव्य साधना,
जीवन में फलदाई है,
मन मंदिर में ज्योत जली,
श्रद्धा ये अब रंग लाई है,
कर्म निर्जरा को करने की,
मंगल घड़ियां आई है।।
संयम तप और त्याग से,
जीवन ये महकाया है,
आत्मा के उजियारे से,
अज्ञान ये दूर भगाया है,
भक्ति की गंगा बहती है,
हर मन को हर्षाई है,
कर्म निर्जरा को करने की,
मंगल घड़ियां आई है।।
वर्षीतप की कठिन साधना,
फिर भी यह सुखदाई है,
कर्म निर्जरा को करने की,
मंगल घड़ियां आई है,
मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ें,
मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ें,
यही राह अब तो सुहाई है,
कर्म निर्जरा को करने की,
मंगल घड़ियां आई है।।
Singer – Ajit Golchha, Delhi
8010053155








