ऊँची टेकरी पे बैठा,
भोला जोड़ा से।
दोहा – गौरा मैया बैठी है,
शंकर जी के पास,
सावन रिमझिम झुमतो,
मनडो भयो उछास।
ऊँची टेकरी पे बैठा,
भोला जोड़ा से,
अरे नाच म्हारी गौरा,
मरोड़ा से।।
शीश गौरा के बिंदिया सोहे,
शीश गौरा के बिंदिया सोहे,
वाकी पायल खनके जोरा से,
अरे नाच म्हारी गौरा,
मरोड़ा से।।
नाक गौरा के नथनिया सोहे,
नाक गौरा के नथनिया सोहे,
वांको लहंगो घूमे घूमरिया से,
अरे नाच म्हारी गौरा,
मरोड़ा से।।
हाथ गौरा के मेहंदी सोहे,
हाथ गौरा के मेहंदी सोहे,
वांकी चुनरी चमके हीरा से,
अरे नाच म्हारी गौरा,
मरोड़ा से।।
गोरी गोरी बईया पे हरा हरा कँगना,
गोरी गोरी बईया पे हरा हरा कँगना,
गौरा जी के शीश पे,
बिंदी शोभा देत,
पग पायल झंकार से,
यों जीवडो हर लेत।।
ऊंची टेकरी पे बैठा,
भोला जोड़ा से,
अरे नाच म्हारी गौरा,
मरोड़ा से।।
गायक / लेखक – जीवन योगी।
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ये भी देखें – धोली छतरिया में बैठया।








