जब ज़िद पे आ गई पार्वती,
पार्वती, पार्वती,
समझाने पहुँचे सप्तऋषि,
सप्तऋषि, सप्तऋषि,
काय ज़िद कर रही,
काय खो मर रही,
काय ज़िद कर रही,
काय खो मर रही,
ऐसे वर के लाने,
जाके सीस पे गंगा,
और गले में,
डारे फिर रहे साँप,
इतने सीधे-सादे है,
सब कहते भोलेनाथ भोलेनाथ।।
ना खपरा ना छपरा,
ना फूस की धरे मढ़ैया,
का खावे को धरो वहाँ,
बस रोवत रहत लड़इया,
भेष धरे अवधूत फिरे,
अब तुमसे का कहे बिन्नू,
टोड़ा डंडड़ ले घूमें,
के बिन के कछुई नइयाँ,
काय ज़िद कर रही,
काय खो मर रही,
काय ज़िद कर रही,
काय खो मर रही,
ऐसे वर के लाने,
जाके सीस पे गंगा,
और गले में,
डारे फिर रहे साँप,
इतने सीधे-सादे है,
सब कहते भोलेनाथ भोलेनाथ।।
जटा लटा न कबहुँ सँवारे,
दीसत महाभयंकर,
मूड़ पे आधो चंदा और,
बेला पे घूमे शंकर,
राम नाम के रसिया है वे,
और उन्हें क्या चाहने,
कामदेव के मर्दनहारी,
घर-गृहस्थी का जाने,
काय ज़िद कर रही,
काय खो मर रही,
काय ज़िद कर रही,
काय तप कर रही,
ऐसे वर के लाने,
जाके सीस पे गंगा,
और गले में,
डारे फिर रहे साँप,
इतने सीधे-सादे है,
सब कहते भोलेनाथ भोलेनाथ।।
जब ज़िद पे आ गई पार्वती,
पार्वती, पार्वती,
समझाने पहुँचे सप्तऋषि,
सप्तऋषि, सप्तऋषि,
काय ज़िद कर रही,
काय खो मर रही,
काय ज़िद कर रही,
काय खो मर रही,
ऐसे वर के लाने,
जाके सीस पे गंगा,
और गले में,
डारे फिर रहे साँप,
इतने सीधे-सादे है,
सब कहते भोलेनाथ भोलेनाथ।।
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🎤 Singer & Lyrics – Sadhu S. Tiwari








