थारी बांकी अदा पे वारूं प्राण श्याम रंगीऴा मिलता रईज्यो जी

थारी बांकी अदा पे वारूं प्राण,
ओ जी श्याम रंगीऴा,
मिलता रईज्यो जी,
थां की मारै छै मीठी मुस्काण़,
थां रा नैण रसीऴा,
खिलता रईज्यो जी।।

तर्ज – थाण़ै रस्तै मं होसी गणगौर।



मन का थे मनमौजी कान्हा,

मनगरा जी राज,
कोई दिन तो आवो थे,
म्हां रै घरां जी राज,
म्हां की छोटी सी अरजी नै ल्यो माण़,
म्हां रा छैऴ छबीळा, मिलता रईज्यो जी।।



पड़दो थां रै स्यूं कांईं,

राखणों जी राज,
थां रै स्यूं ई तो सांचो,
भाखणों जी राज,
थां को रसना स्यूं करां के बखाण़,
थां रा नैण रसीऴा, मिलता रईज्यो जी।।



आंधा री थे ई कान्हा,

लाकड़ी जी राज,
म्हां पै सांवरिया थां री,
ठाकरी जी राज,
थां को नित की करां छां गुणगान,
म्हां रा श्याम सजीऴा, मिलता रईज्यो जी।।



श्याम बहादुर सांचा,

सांवरा जी राज,
नैणां सुरंगा म्हां रै,
राव रा जी राज,
थे ई “शिव” रा तो सांचा जिजमाण़,
गोपाळ हठीऴा, मिलता रईज्यो जी।।



थारी बांकी अदा पे वारूं प्राण,

ओ जी श्याम रंगीऴा,
मिलता रईज्यो जी,
थां की मारै छै मीठी मुस्काण़,
थां रा नैण रसीऴा,
खिलता रईज्यो जी।।

स्वर – संजू शर्मा जी।
प्रेषक – विवेक अग्रवाल जी।
9038288815