प्रभु की भक्ति बिना धिक्कार,
जगत में जीवणा रे।।
भोगे सब पृथ्वी को राज,
होवे सब भूपो में सिरताज,
भोगे चाहे स्वर्ग पाताल को राज,
तो भी भक्ति बिना धिक्कार,
जगत में जीवणा रे।।
सुंदर बदन मनोहर सोई,
शक्ति शत्रु दमन की होई,
जीवे चाहे कोटि कल्प यदि कोई,
तो भी भक्ति बिना धिक्कार,
जगत में जीवणा रे।।
होवे चौदह विद्या निदान,
पूर्ण सकल विद्वान,
जाको दसों दिशाओं में नाम,
तो भी भक्ति बिना धिक्कार,
जगत में जीवणा रे।।
धन हो स्वर्ण मेरु समाना,
होवे सब रत्नों की खाना,
जिनका होवे अटूट खजाना,
तो भी भक्ति बिना धिक्कार,
जगत में जीवणा रे।।
धन हो जोबन विद्या सारा,
इनसे होगा नहीं निस्तारा,
अचलाराम झूठा सब संसारा,
प्रभु की भक्तिं बिना धिक्कार,
जगत में जीवणा रे।।
प्रभु की भक्ति बिना धिक्कार,
जगत में जीवणा रे।।
🎤 गायक / Singer – आत्माराम जी महाराज।
📜 प्रेषक / Upload By – रामराज सिंह देवखेड़ी।
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