नर खाली हाथ काई बैठो,
दे जासी काल लपेटो।।
किरपा करी हरि मिनख बणायो,
भटकत भटकत अवसर पायो,
अब छोड विषयो हेटो रे,
दे जासी काल लपेटो।।
मनुष्य जन्म ये कर्म भोमका,
करले कमाई ओम सोहम् का,
दुख जन्म मरण का मेटो रै,
दे जासी काल लपेटो।।
योग ओर यज्ञ सत्संग करले,
पाप कटे हरि नाम सुमर ले,
फिर आलस भजन मे काई बेठो रै,
दे जासी काल लपेटो।।
दुजा मरता दिखे तुझको,
अपनी मोत सुझे न तुझको,
अब मन को करले हेटो रे,
दे जासी काल लपेटो।।
निर्भय पुरी गुरू सेन बताई,
अवश्य मोत आवेगी भाई,
प्रभु जल्दी समान समेटो रै,
दे जासी काल लपेटो।।
नर खाली हाथ काई बैठो,
दे जासी काल लपेटो।।
गायक – मनोहर परसोया।
कविता साउँण्ड किशनगढ।








