नंदी पे चली है,
बारात भोले की,
सबसे अलग है,
यो बात भोले की,
अरे शूकर नाचे,
शनिचर नाचे,
संग में भूत पिशाचर नाचे,
देख ले तू गोरां,
यो ठाठ भोले की।।
चले है शिव जैसे मस्त मलंगा,
गले में सर्प जटा में गंगा,
हाथ में डम डम,
डमरू बाजे,
माथे चंदा कितना साजे,
आज दिन है भोले का,
और रात भोले की,
नन्दी पे चली है,
बारात भोलें की।।
गोरां नगरी थर थर काँपे,
भूत पिशाचर देख झाँके,
गले में है,
नर मुंडों की माला,
शोर मचावे,
अजब निराला,
तू जीत है गोरा,
तू मात भोले की,
नन्दी पे चली है,
बारात भोलें की।।
फेरों पर जब आयी गोरा,
शरमाए देखो कैसे भोला,
सात फेरे संग लगाके,
वर माला ली,
सर को झुका के,
हो गई है गोरां,
देखो आज भोले की,
नन्दी पे चली है,
बारात भोलें की।।
फूल देखो गगन से बरसे,
देवता सब उतरे स्वर्ग से,
शिव मिलन की,
बेला आयी,
देने आये सब,
शिव को बधाई,
कलम प्रकाश की,
और बात भोले की,
ख़ुशी गाती है,
महिमा दिन रात,
नन्दी पे चली है,
बारात भोलें की।।
नंदी पे चली है,
बारात भोले की,
सबसे अलग है,
यो बात भोले की,
अरे शूकर नाचे,
शनिचर नाचे,
संग में भूत पिशाचर नाचे,
देख ले तू गोरां,
यो ठाठ भोले की।।
Singer / Upload – Bawri Khushi
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