सतगुरु सा री ओळु आवे रे,
मारो रोम रोम गरणावे रे,
रोम रोम गरणावे रे,
मारो हिवड़ो हिलोरा खावे रे।।
रात दिवस म्हाने नींद नी आवे,
अन्न पानी मने कछु नहीं भावे,
मारे नैना नीर भर आवे रे,
मारो बालक जीव घबरावे रे,
सतगुरुसा री ओल्यू आवे रे,
मारो रोम रोम गरणावे रे।।
पल पल छिन छिन याद सतावे,
ऐडा ऐडा बादल घटा चढ़ आवे,
मारी सुरता शोर मचावे रे,
मारा गुरु बिन रयो नहीं जावे रे,
सतगुरुसा री ओल्यू आवे रे,
मारो रोम रोम गरणावे रे।।
चढ़ी खुमारी मारे प्रेम री,
गुरु बिन रयो नहीं जावे रे,
किस्मत री काई-काई गावे रे,
मारा गुरूसा फिर नहीं आवे रे,
सतगुरुसा री ओल्यू आवे रे,
मारो रोम रोम गरणावे रे।।
जहाज पड़ी दरियाव बीच में,
अध बिच गोता खावे रे,
सतगुरु केवट बण आवे रे,
मारी नैया पार लगावे रे,
सतगुरुसा री ओल्यू आवे रे,
मारो रोम रोम गरणावे रे।।
गौड़ भागीरथ भजन बणावे,
कुशल रतन थारो गुण गावे,
ओ तो भजन मोइनुदीन गावे रे,
गुरु चरणा में शीश निवावे रे,
सतगुरुसा री ओल्यू आवे रे,
मारो रोम रोम गरणावे रे।।
सतगुरु सा री ओळु आवे रे,
मारो रोम रोम गरणावे रे,
रोम रोम गरणावे रे,
मारो हिवड़ो हिलोरा खावे रे।।
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – बद्री लाल सुखपुरा।
9314219999








