ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आए रे,
कैसे मिलन होगा,
हाय कोई तो बताए रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
तर्ज – बाबुल का ये घर।
श्याम तेरे दर्शन को,
अँखियाँ तरस गई,
आए तेरी याद मुझे,
दिन-रात रुलाए रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
विनती कर-कर के,
मैं हार गया हूँ रे,
आजा तू भी आ भी जा,
तेरा भक्त बुलाए रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
भक्ति में मेरी क्या,
श्याम कमी पाई,
सब कुछ किया अर्पण,
तू और क्या चाहे रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
चुप क्यों है बैठा,
मुझको जवाब तो दे,
क्या है खता मेरी,
क्यों मुझको सताए रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
धीर धरूँ तो धरूँ,
मैं कैसे तू ही बता,
तू मेरी अर्ज़ी निस,
दिन ही ठुकराए रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
तुझ बिन श्याम मेरा,
किस काम का है जीवन,
लौटा ले प्राण मेरे,
अब जिया नहीं जाए रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आए रे,
कैसे मिलन होगा,
हाय कोई तो बताए रे,
ढल गए सूरज कई,
मेरे श्याम ना आये रे।।
Singer – Kumar Vishu Ji
Lyricist – Shankar Ajnabi








