बाबा कलियुग का भगवान है,
हम मगर फिर भी अंजान है,
खाटू में रुप है श्याम का,
जो ईश्वर की पहचान है।।
तर्ज – ये तो सच है की।
कहीं भटके हुओ को सहारा मिला,
डूबा संसार में तो किनारा मिला,
ऐसे उपकार है क्या करें,
जो बताना ना आसान है,
खाटू में रुप है श्याम का,
जो ईश्वर की पहचान है।।
बाबा चौखट तेरी जब बहुत दूर थी,
बंद किस्मत मेरी वो भी मजबूरी थी,
बुलावा आया तेरा क्या कहे,
मन की तू जानता बात है,
खाटू में रुप है श्याम का,
जो ईश्वर की पहचान है।।
हुई मन्नत पूरी झोली तूने भरी,
कष्ट काटे सभी और विपदा हरी,
तेरी कृपा बड़ी क्या कहें,
क्या ये ‘जीवन’ की औकात है,
खाटू में रुप है श्याम का,
जो ईश्वर की पहचान है।।
बाबा कलियुग का भगवान है,
हम मगर फिर भी अंजान है,
खाटू में रुप है श्याम का,
जो ईश्वर की पहचान है।।
Singer & Lyrics – Jivan Yogi








